अवलोकन:
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 के द्वारा देश के प्रत्येक जिले में एक जवाहर नवोदय विद्यालय की स्थापना की परिकल्पना की गई प्रायोगिक आधार पर पहले दो विद्यालय 1985-86 में शुरू किए गये । अब विद्यालयों  की संख्या 34 राज्यों और संघ शासित प्रदेशों में  595 से अधिक हो चुकी है।  इन विद्यालयों में 2.90 लाख से अधिक छात्र  शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। जवाहर नवोदय विद्यालय पूरी तरह आवासीय व सह शिक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत संचालित होते हैं और इनमें छठी से बारहवीं कक्षा तक की शिक्षा प्रदान की जाती है। विद्यालय में दाखिल सभी विद्यार्थियों की शिक्षा मुफ़्त है, जैसे- लॉजिंग , बोर्डिंग , पाठ्य पुस्तकें, वर्दी आदि। ये विद्यालय मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतिभाशाली, कुशाग्र और मेधावी बच्चों को बढावा देने व उनके विकास हेतु कार्यरत हैं, जिससे वे अच्छी शिक्षा के अवसर से वंचित न रहें। ये विद्यालय केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से संबद्ध हैं। विद्यालयों में प्रवेश छठी कक्षा से होता है, जो सीबीएसई द्वारा जिला स्तर पर आयोजित खुली परीक्षा के माध्यम से किया जाता है । प्रति वर्ष लगभग 40,000 विद्यार्थियों को देश के नवोदय विद्यालयों में प्रवेश दिया जाता है ।

प्रबंधन
जवाहर नवोदय विद्यालयों की श्रृंखला
का प्रबंधन नवोदय विद्यालय समिति द्वारा किया जाता है,जो   मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अधीन आने वाले स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग का एक स्वायत्त संगठन है समिति मानव संसाधन विकास मंत्री की अध्यक्षता में एक कार्यकारी समिति के माध्यम से कार्य करती है मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री समिति का  उपाध्यक्ष होता है कार्यकारी समिति को अपने कार्यों में वित्त समिति व शैक्षिक सलाहकार समिति की सहायता मिलती है।
समिति के अंतर्गत को अपने संबंधित क्षेत्रों के तहत विद्यालयों के प्रशासन के लिए आठ क्षेत्रीय कार्यालय हैं।प्रत्येक विद्यालय के सामान्य निरीक्षण के लिए, एक विद्यालय सलाहकार समिति और एक विद्यालय प्रबंधन समिति होती है संबंधित जिले का जिला मजिस्ट्रेट विद्यालय स्तर समितियों का अध्यक्ष होता है तथा स्थानीय शिक्षाविद , जन प्रतिनिधि और अधिकारी उक्त समितियों के  सदस्य के रूप में काम करते हैंन०वि०स० का  मुख्यालय नोयडा, गौतम बुद्ध नगर ज़िला, उत्तर प्रदेश में स्थित है।

ज.न.वि. दक्षिण कन्नड़ के बारे में

दक्षिण कन्नड़ जिला  झालरदार तटों, हरे भरे खेतों और करामाती जंगलों की एक चित्रमाला है । इस के पूर्व दिशा में पश्चिमी घाट और पश्चिमी किनारे के साथ गर्जन करता हुआ अरब सागर है । एक महत्वपूर्ण बंदरगाह के साथ, यह तटीय शहर एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र भी है जिले की जीवन रेखा ,राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 17 , लगभग 95 से अधिक किलोमीटर की दूरी तक समुद्र के समानांतर चलता है

मंगलौर भारतीय प्रायद्वीप के दक्षिण पश्चिमी हिस्से में खूबसूरत हरी भूमि के एक लंबे भाग तक विस्तृत है ' मंगलौर ' शब्द का मतलब ’शुभ जगह’ है। ' मंगला ' ( संस्कृत ) का अर्थ खुशी शुभ है ,  औरऊरु का अर्थ है -’प्रदेश’। ' मंगलौर ' शब्द  पुर्तगाली  भाषा के 'मंगलूरु या ’मंगलपुरा’ शब्द  का  बिगडा हुआ रूप है लेकिन यहाँ के  मूल निवासी इस जगह की पहचान ”कुड्ला” /’कोडियाल” अर्थात  ’दो  नदियों  के संगम’  के अर्थ के रूप में करते हैं। ’कूडू’ का मतलब है ’संगम’ और ’अला’ का अर्थ पानी या नदी है । दक्षिण कन्नड़ ज़िले में स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय,नवोदय विद्यालय समिति हैदराबाद संभाग के अंतर्गत आता है

हमारे विद्यालय के विषय में महत्त्वपूर्ण सूचनाएँ निम्नलिखित है:

1. स्थापना की तिथि और वर्ष: 21/08/2001
2 . विद्यालय का पता: जवाहर नवोदय विद्यालय , बालेपुणि, मुडिपु, कुर्नाड पोस्ट, बंटवाल ताल्लुक, दक्षिण कन्नड़ ज़िला , कर्नाटक राज्य-574 153 3 . भौगोलिक स्थिति : विद्यालय मंगलूर शहर  से 25 किलोमीटर दूर स्थित है ।

समितियों का गठन

समिति के निर्देशानुसार निम्नलिखित समितियाँ मई महीने में गठित की जाएँगी ।

१.     विद्यालय प्रबंधन समिति ।

२.     विद्यालय सलाहकार समिति ।

३.  विद्यालय क्रय सलाहकार समिति ।   

   ४.  विद्यालय स्तर नियुक्ति समिति ।

   ५.  रख-रखाव एवं मरम्मत समिति ।

   विद्यालय के विविध क्षेत्रों के विकास के लिए विचार विमर्श करने हेतु विद्यालय प्रबंधन समिति की एक वर्ष में कम से कम दो बार और विद्यालय सलाहकार समिति की  बैठक एक वर्ष में कम से कम एक बार होगी । विद्यालय के बुनियादी ढाँचे के विकास एवं संसाधन जुटाने के तरीकों का पता लगाने के लिए विद्यालय सलाहकार समिति के सदस्य वर्ष में एक बार अवश्य मिलेंगे । अन्य समितियों की भी ज़रूरत के अनुसार समय-समय पर बैठक होगी ।

शैक्षणिक गतिविधियाँ

सतत और व्यापक मूल्यांकन: (छठी से दसवीं कक्षा तक)

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने दसवीं  तक की कक्षाओं के लिए  सतत एवं विस्तृत मूल्यांकन योजना लागू किया है ।

·       सामान्यत: सी०सी०ई० के प्रयोजन के लिए, एक शैक्षणिक वर्ष को दो सत्रों में विभाजित किया गया है।पहला सत्र १ अप्रैल २०१२ से अक्टूबर के दूसरे सप्ताह तक तथा दूसरा सत्र  अक्टूबर २०१२ के तीसरे सप्ताह से ३१ मार्च २०१३ तक निर्धारित किया गया है ।

*सी०सी०ई० एक वर्ष के  दो सत्रों  में  समाहित दोनों शैक्षणिक और सह-शैक्षणिक क्षेत्रों के मूल्यांकन के माध्यम से विद्यार्थियों का समग्र प्रोफ़ाइल प्रदान करता है ।

* शैक्षिणिक क्षेत्रों का मूल्यांकन:- प्रत्येक सत्र  में दो रचनात्मक मूल्यांकन और एक संकलित मूल्यांकन होंगे ।

    ·       सह शैक्षणिक क्षेत्र:-

·       सह शैक्षणिक उपलब्धियों को नियमावली में दिए - २(ए.बी.सी.और डी) और ३ (क,ख)बिंदुओं को ५ सूत्रीय पैमाने पर मूल्यांकित किया जाएगा । मूल्यांकन की प्रक्रिया शैक्षणिक वर्ष में लगातार चलती रहेगी,लेकिन ग्रेडिंग शैक्षणिक वर्ष के अंत में की जाएगी ।सह शैक्षणिक मूल्यांकन के लिए ’त्रिकोणीयकरण तकनीक’ का होना आवश्यक है । इसके अंतर्गत साक्ष्य एकत्रित करना और उसकी व्याख्या (कम से कम तीन) शामिल है । विवरण के लिए रेटिंग एक से पाँच तक होगी।विस्तृत जानकारी के लिए सी.बी.एस.ई द्वारा प्रकाशित नियमावली को देखें ।

             रचनात्मक व संकलित मूल्यांकन और प्री-बोर्ड परीक्षा २०१२-१३ की  अनुसूची

क्रम संख्या

मूल्यांकन

तारीख

रचनात्मक मूल्यांकन-१

१९ से २१ जुलाई २०१२ तक

२.

रचनात्मक मूल्यांकन-२

६ से ८ सितंबर २०१२ तक

३.

संकलित मूल्यांकन-१

१ से ११ अक्टूबर २०१२ तक 

४.

रचनात्मक मूल्यांकन-३

२० से २२ दिसंबर २०१२ तक

५.

रचनात्मक मूल्यांकन-४

१८ से २० फ़रवरी २०१३ तक

६.

संकलित मूल्यांकन-२

१२ से २६ मार्च २०१३ तक

७.

प्री-बोर्ड -१, कक्षा-१२

४ से १३ दिसंबर २०१२ तक

८.

प्री-बोर्ड -२,  कक्षा-१२

१६ से ३१ जनवरी २०१३ तक 

९.

पुनरावृत्ति परीक्षा –बारहवीं कक्षा

१५ से २५ फ़रवरी २०१३ तक

11 और १२ कक्षाओं के लिए:-

इकाई परीक्षाओं २०१२-२०१३ ( ११ व १२ कक्षाएँ) की अनुसूची :-

क्रम संख्या

इकई परीक्षा

माह

कक्षा

टिप्पणी

१.

जून/जुलाई

११ व १२

इकाई परीक्षाओं की तिथियाँ विद्यालय स्तर पर निर्धारित की जाएगी ।

२.

अगस्त

११ व १२

३.

सितंबर

११ व १२

४.

नवंबर

११ व १२

५.

दिसंबर

११

६.

६.

जनवरी २०१३

११

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